ये एक बेट्समेन है और ये क्रिकेट में आज तक  सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाडी है . इनके चाहने वाले इन्हें क्रिकेट की दुनिया का भगवान कहते है .

इनका जन्म मुंबई के दादर के निर्मल नर्सिंग होम में एक महाराष्ट्रियन ब्राह्मण परिवार में हुआ था. इनके पिता एक मराठी नावेल लेखक थे और इनकी माँ एक इन्शुरेंस कंपनी में कार्य करती थी .

ये चार भाई बहन थे 3  भाई और 1 बहन , सचिन सबसे छोटे थे , इनके तीनो भाई बहन इनके पिता जी की पहली पत्नी के बच्चे थे .

सचिन पढाई में बहुत अच्छे नहीं थे ये मध्यम श्रेणी के विद्यार्थी थे. इनकी आरंभिक शिक्षा बांद्रा की इन्डियन एजुकेशन सोसाइटी की न्यू इंग्लिश स्कूल में हुई .

फिर क्रिकेट के प्रति इनकी रूचि देख कर इनके क्रिकेट के प्रशिक्षक रमाकांत आचरेकर के कहने पर इन्हें मुंबई के दादर की  शारदाश्रम विद्या मंदिर में दाखिला दिलवाया गया .

सचिन को बचपन से क्रिकेट खेलने का शौक था इनका मन पढाई में नही लगता था , ये सारा दिन अपनी बिल्डिंग के सामने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलते थे.

शुरुआत में ये टेनिस बॉल से प्रेक्टिस करते थे , इनके बड़े भाई अजित तेंदुलकर ने इनका क्रिकेट के प्रति रुझान देखा और अपने पिताजी रमेश तेंदुलकर से चर्चा की.

अजित ने कहा यदि हम सचिन को सही मार्गदर्शन करेंगे, तो यह क्रिकेट में कुछ अच्छा करने में सक्षम है. सचिन के पिताजी ने सचिन को बुलाया, तब वे केवल 12 वर्ष के थे

इनकी पत्नी का नाम अंजली तेंदुलकर है , अंजलि एक शिशु रोग विशेषज्ञ है और प्रसिद्ध उद्योगपति अशोक मेहता की बेटी है.

सन 1988 में इन्होंने राज्य स्तरीय मैच में मुंबई टीम से खेल कर अपने करियर का पहला शतक बनाया. 11 महीने के बाद इंडिया पाकिस्तान के मैच में पहली बार इन्होंने इंडिया की तरफ से क्रिकेट खेला.

सचिन का फर्स्ट अंतरराष्ट्रीय मैच पाकिस्तान के साथ 16 वर्ष की उम्र में हुआ, तब इन्होने अपना जोरदार प्रदर्शन किया और इस मैच में इन्हें नाक पर चोट लगी

और जोरदार खून निकलने लगा, लेकिन इन्होने हार नही मानी और अच्छा प्रदर्शन किया और पाकिस्तानी टीम के खिलाड़ियों के छक्के छुड़ा दिए .

– 1990 में इन्होंने अपना पहला टेस्ट मैच खेला, जो कि इंडिया और इंग्लैंड के बीच था . और यहाँ इन्होंने शतक बनाकर कम उम्र में शतक बनाने का रिकॉर्ड बनाया.

इनका प्रदर्शन से सभी मोहित थे, इसलिए इन्हें 1996 के वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का कप्तान बनाया गया . 1998 में इन्होने कप्तानी छोड़ दी

सन 2001 में वनडे मैच में दस हजार रन बनाने वाले ये प्रथम क्रिकेटर बने. 2003 का समय इनका सुनहरा समय था इनके चाहने वाले बड़ते जा रहे थे .

इन्होने 463 वन डे मैच में अपना प्रदर्शन किया है और 49 शतक और 96 अर्धशतक बनाई है. इन्होंने ने टोटल 200 टेस्ट मैच खेले है . जिसमे 51 शतक और 68 अर्धशतक बनाई है

इन्होंने केवल एक टी 20 मैच खेला है, इस मैच में इन्होंने 10 रन बनाए और 2 चौके मारे है. इन्होंने अपने करियर में आईपीएल के कुल 78 मैच खेले, जिसमे 295 चौके और 29 छक्के मारकर, एक शतक और 13 अर्धशतक बनाई .

दिसंबर 2012 में इन्होने वनडे मैच से सन्यास लेने का फैसला लिया . जनवरी 2013 में इन्होंने क्रिकेट से रिटायरमेंट ले लिया

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