रामनवमी आज यानी 10 अप्रैल दिन रविवार को है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रामनवमी के दिन भगवान राम का जन्म हुआ था। इसलिए इसे राम जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं।

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भगवान श्री राम को मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। उन्हें पुरुषोत्तम यानि श्रेष्ठ पुरुष की संज्ञा दी जाती है। वे स्त्री पुरुष में भेद नहीं करते।

कहा जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म रावण के अंत के लिए हुआ था। चैत्र कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि के दिन सरयू नदी के किनारे बसी अयोध्यापुरी में राजा दशरथ के घर में भगवान श्री राम का जन्म हुआ था।

जिस दिन अयोध्या में माता कौशल्या की कोख से भगवान राम का जन्म हुआ था, उस दिन चारों ओर हर्षों- उल्लास का माहौल था।

– धार्मिक पुराणों के अनुसार राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया था, जिसके बाद उन्हें चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी। राम उनके सबसे बड़े पुत्र थे।

– श्री राम जी का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र में कर्क लग्न में, दोपहर के समय में हुआ था जब पांच ग्रह अपने उच्च स्थान में थे और उस सम अभिजीत महूर्त था।

– भगवान श्री राम के जन्म के समय शीतल, मंद और सुगंधित पवन बह रही थी। देवता और संत खुशियां मना रहे थे। सभी पवित्र नदियां अमृत की धारा बहा रही थीं।

– भगवान के जन्म के बाद ब्रह्माजी के साथ सभी देवता विमान सजा-सजाकर अयोध्या पहुंच गए थे। आकाश देवताओं के समूहों से भर गया था।

– संपूर्ण नगर में उत्सव का माहौल हो गया था। राजा दशरथ आनंदित थे। सभी रानियां आनंद में मग्न थीं। राजा ने ब्राह्मणों को सोना, गो, वस्त्र और मणियों का दान दिया॥