जेप्टो को इस राउंड में 100 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली है. महज डेढ़ महीने पहले जेप्टो की वैल्यू 225 मिलियन डॉलर आंकी गई थी. तब स्टार्टअप ने 60 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल की थी।

प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) में पढ़ाई करना लोगों का सपना होता है, लेकिन बचपन के दोस्त आदित पलीचा और कैवल्य वोहरा का सपना कुछ अलग करने का था।

महज 19 साल के आदित पलीचा ने अपने सपने को पूरा करने के लिए स्टैनफोर्ड की पढ़ाई बीच में छोड़ दी और कैवल्य के साथ बिजनेस लाइन में उतर गए.

दोनों को इस राह पर सफलता भी हाथ लगी और इंस्टैंट ग्रॉसरी डिलीवर करने वाली उनकी स्टार्टअप कंपनी जेप्टो महज पांच महीने में 43 सौ करोड़ रुपये की कंपनी बन गई।

जेप्टो को ताजा फंडिंग राउंड (Funding Round) में 570 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,300 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन मिली है. वाई कम्बिनेटर की अगुवाई में जेप्टो को इस राउंड में 100 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली है.

वाई के साथ ही ग्लेड ब्रुक कैपिटल पार्टनर्स, नेक्सस वेंचर्स पार्टनर्स और सिलिकॉन वैली इन्वेस्टर से इन्वेस्टमेंट मिला है.नेक्सस वेंचर्स, ग्लोबल फाउंडर्स और लैची ग्रूम इन्वेस्टर पैसे लगा चुके हैं

जेप्टो ने इसी साल मुंबई से काम करना शुरू किया और अभी बेंगलुरू, दिल्ली, गुरुग्राम, चेन्नई में भी सर्विस दे रही है. आने वाले समय में हैदराबाद, पुणे, कोलकाता जैसे शहरों में ऑपरेशन शुरू करने वाली है.

इन कंपनियों से होगा मुकाबला इंस्टैंट डिलीवरी मार्केट में जेप्टो का मुकाबला ग्रोफर्स और डुंजो जैसी कंपनियों से है. ग्रोफर्स ने हाल ही में ब्रांड का नाम बदलकर ब्लिंकइट कर दिया है.