बॉबी देओल की सीरीज आश्रम का तीसरा सीजन एक बदनाम आश्रम स्ट्रीम हो गया है। हर बार की तरह इस बार भी फैंस इस सीरीज को देखने के लिए काफी एक्साइटेड हैं।

प्रकाश झा द्वारा डायरेक्टेड इस सीरीज में बाबा निराला की एक बार फिर वापसी हो गई है। तो अगर आप सीरीज देखने का प्लान बना रहे हैं तो पढ़ें ये रिव्यू।

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इस बार आश्रम के तीसरे सीरीज के 10 से ज्यादा एपिसोड्स हैं। इस सीरीज के तीसरे सीजन को 2 साल लगे हैं बनाने में और इस सीजन का नाम है एक बदनाम आश्रम।

आश्रम, निराला बाबा पर आधारित है जो बाबा के रूप में एक राजनीतिक/आपराधिक साम्राज्य का निर्माण करता है।

यह पिछले सीजन से शुरू होता है जब उसकी एक शिष्य पम्मी (आदिति पोहनकर) उसके द्वारा यौन शोषण के बाद उसके चंगुल से बच गई और अब बदला लेने के लिए बाहर आ गई है।

आश्रम का आइडिया अच्छा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, धोखेबाजों और उनके क्राइम समीक्षकों और दर्शकों द्वारा पसंद किया जा रहा है।

लेकिन इस बार सीरीज में पहले जितना थ्रिल नहीं है। हालांकि ड्रामा बढ़ा है, म्यूजिक भी काफी तेज है और परफॉर्मेस तो सबकी शानदार है।

शो में ज्यादा बोल्ड और वल्गर सीन नहीं है, लेकिन कुछ सीन ऐसे हैं जो गुदगुदाते हैं। जो सीरीज का टोन है वो आपको ऐसे लगेगा जैसे 90 के क्राइम ड्रामा होते हैं।

बॉबी देओल ने अपना शानदार काम किया है। बाबा निराला के रूप में उन्हें देखकर ऐसा लग रहा है जैसे उनके अलावा ये कोई और कर ही नहीं सकता।

नेगेटिव रोल होकर भी दर्शकों को वह पसंद आए। बॉबी को चंदन रॉय सान्याल का पूरा सपोर्ट मिला है। चंदन ने भोपा सिंह के किरदार को बखूबी निभाया है।

इसके साथ ही शो में बाकी स्टार्स का टैलेंट भी दिखा जैसे अनुप्रिया गोयनका और दर्शन कुमार। दोनों को भले ही स्क्रीन स्पेस ज्यादा नहीं मिला, लेकिन दोनों ने कम स्पेस में भी अपनी छाप छोड़ दी है।

ओवरऑल कहें तो आश्रम ने बहुत कोशिश की है एक स्मार्ट शो बनाने की, लेकिन ये फेल हो गया क्योंकि इसे स्मार्टली लिखा नहीं गया।